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Enjoying a long healthy life through D.A.J.Jal

In the modern days,we are exposed to increased toxic effect due to highly polloted environments,bad eating habits and odd sleeping rest,lack of exercise,increased use of drug and medicines,great mental and physical strain etc. All leading to weak immune system, detoxification, elimination system resulting in over-all poor health. To over come this decay in health,"Devashish Akshay Jeevan Jal" is God gifted natural medicated combination of seeds and herbs.....

   

 

Benefits Of D.A.J.Jal

  • Digestive disorders such as gastritis, hyperacidity,spastic.........
  • Respiratory disorder such as sinusitis, bronchitis, asthama etc.
  • Inherent tendencies before they become a serious illness or degenerative disease.
  • Mental and Emotional problems to reduce the effects of recent stresses, long term of anger, depression or anxiety.
  • Physical injury and bed sores.
  • Uninary,Menstrual and reproductive disorder.
  • Addiction and substance abuse.
  • Sleep Disorde's such as headaches ,sore throats,ear infection,intestinal upsets cold and flu etc.

Its Naturalistic Medicine

"Devashish Akshay Jeevan" Have Naturalistic Character-

  • No restriction with any pathy.
  • No restriction in diet till cleansing of body.
  • Fiber waste is for plants natural fertilizer.
  • Membrane filtered extract is medicine for cattles.
  • During manufacturing No Air, Sound and Heat Pollution.
  • 110% No side effect.
  • Medicine is based on hydrotheraphy and is far from Aquatic Toxicology.
श्री महाकालेश्वर ज्योति लिंग उज्जैन
 

 

Testimonials

क्यों व्यर्थ की चिंता करते हो? किससे व्यर्थ डरते हो? कौन तुम्हें मार सक्ता है? अात्मा ना पैदा होती है, न मरती है।
जो हुअा, वह अच्छा हुअा, जो हो रहा है, वह अच्छा हो रहा है, जो होगा, वह भी अच्छा ही होगा। तुम भूत का पश्चाताप न करो। भविष्य की चिन्ता न करो। वर्तमान चल रहा है।

तुम्हारा क्या गया, जो तुम रोते हो? तुम क्या लाए थे, जो तुमने खो दिया? तुमने क्या पैदा किया था, जो नाश हो गया? न तुम कुछ लेकर अाए, जो लिया यहीं से लिया। जो दिया, यहीं पर दिया। जो लिया, इसी (भगवान) से लिया। जो दिया, इसी को दिया।

खाली हाथ अाए अौर खाली हाथ चले। जो अाज तुम्हारा है, कल अौर किसी का था, परसों किसी अौर का होगा। तुम इसे अपना समझ कर मग्न हो रहे हो। बस यही प्रसन्नता तुम्हारे दु:खों का कारण है।

परिवर्तन संसार का नियम है। जिसे तुम मृत्यु समझते हो, वही तो जीवन है। एक क्षण में तुम करोड़ों के स्वामी बन जाते हो, दूसरे ही क्षण में तुम दरिद्र हो जाते हो। मेरा-तेरा, छोटा-बड़ा, अपना-पराया, मन से मिटा दो, फिर सब तुम्हारा है, तुम सबके हो।

न यह शरीर तुम्हारा है, न तुम शरीर के हो। यह अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, अाकाश से बना है अौर इसी में मिल जायेगा। परन्तु अात्मा स्थिर है - फिर तुम क्या हो?
तुम अपने अापको भगवान के अर्पित करो। यही सबसे उत्तम सहारा है। जो इसके सहारे को जानता है वह भय, चिन्ता, शोक से सर्वदा मुक्त है।

जो कुछ भी तू करता है, उसे भगवान के अर्पण करता चल। ऐसा करने से सदा जीवन-मुक्त का अानंन्द अनुभव करेगा।

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